गर्मियों में स्वास्थ्य रक्षक शरबत तथा पेयों के महत्व

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गर्मियों में स्वास्थ्य रक्षक शरबत तथा पेयों के महत्व को नकारा नहीं जा सकता । ऐसे द्रव जहां हमें गर्मी से छुटकारा दिलाकर शीतलता एवं तरोताजगी देते हैं, वहीं वे शरीर को आवश्यक पोषक तत्व और रोग निरोधक शक्ति प्रदान करते हैं ।
ऐसे शरबतों एवं पेयों का आप भी लाभ उठाइए :

छाछ या मट्ठा

छाछ या मट्ठा भारत का पुराना और प्रिय घरेलू पेय है । इसका क्षार तत्व शरीर के लगभग सभी विषों को नष्ट करता है । छाछ का उपयोग शोथ (सूजन) और बवासीर को दूर करने वाला होता है । यह शरीर के शक्ति-स्रोतों का अवरोध दूर कर उन्हें बलवान बनाता है । अजीर्ण तथा मोटापे की बीमारियां इसके नियमित सेवन से समाप्त हो जाती हैं ।

घर से छाछ तैयार करने के लिए दही में उसका एक तिहाई पानी मिलाने के बाद मथ कर उसका मक्खन अलग कर देते हैं । स्वाद के अनुसार उसमें काला नमक और जीरा डालकर पीने से पाचन शक्ति से वृद्धि होती है । मीठी छाछ खांसी मिटाती, भूख बढ़ाती तथा हृदय को शक्तिशाली बनाती है ।

पित्त विकार के रोगी को छाछ में बूरा डालकर पीने से लाभ मिलता है । कफ विकारों से सोंठ और काली मिर्च का चूर्ण डालकर पिएं । यदि आपकी प्रवृत्ति वात प्रधान है तो छाछ से स्वादानुसार उचित मात्रा से हींग, भुना हुआ जीरा-चूर्ण व सेंधा नमक डालकर पीजिए । इससे दस्तों में भी आराम मिलता है ।

लू से बचने के लिए छाछ से सूखा पुदीना, पिसा हुआ भुना जीरा और थोड़ा नमक डालकर पीना चाहिए। मोटे लोगों को इस प्रकार की छाछ भोजन से पूर्व पीने से लाभ होता है । इससे बिना किसी कष्ट के मोटापा दूर हो जाता है ।

दही की लस्सी

यह एक ऐसा घरेलू पेय है जो बूरा मिलाकर पीने से गर्मी में शक्ति तथा शीतलता प्रदान कर पाचन शक्ति बढ़ाता है । काला नमक, पुदीना, जीरा मिलाकर पीने से लू से बचाव होता है । इसमें जायफल घिसकर मिला देने से मन-मस्तिष्क को शांति मिलती है और नींद भी गहरी आती है । लस्सी से एन्जाइम्स, लेक्टिक एसिड, लाभदायक लवण, सुपाच्य प्रोटीन और वसा होती है । यह सभी स्वास्थ्य में वृद्धि करते हैं ।

गन्ने का रस

इसमें पाचक एन्जाइम्स तथा 15 से 20 प्रतिशत शर्करा होती है । इसके 100 ग्राम रस से 210 कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है । यह भोजन पचाता, कब्ज दूर करता, शरीर को मोटा करता, हृदय की जलन दूर कर शीतलता और शक्ति देता है ।

लेकिन यह ध्यान रखना चाहिए कि रस ताजा और स्वच्छ पात्र, स्थान तथा मशीन से निकाला गया हो। पीने वाले गिलास भी साफ हों ।

मक्खियां भिनकने वाले गंदे स्थान पर या गंदी मशीन से निकाला गया रस स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है । इस बात पर भी गौर करें कि गन्ना अच्छी क्वालिटी का हो । लकड़ी की स्वच्छ मशीन से स्वच्छता पूर्वक निकाला गया रस अधिक लाभदायक होता है ।
गन्ने के रस में नीबू का रस अवश्य मिला लेना चाहिए । इससे उसकी स्वास्थ्य-शक्ति में वृद्धि होने के, साथ-साथ कीटाणुनाशक प्रभाव बढ़ जाता है । गन्ने के रस का निम्नलिखित बीमारियों में उपयोग करने से लाभ होता है-

पीलिया :

जौ का सत्तू खाकर गन्ने का रस पीने से यह रोग एक सप्ताह में ठीक हो जाता है । इसके साथ ही रोज प्रातःकाल गन्ना चूसें या एक गिलास रस पिएं ।

पित्त की उल्टी :

एक गिलास गन्ने के रस में चाय के दो चम्मच शहद मिलाकर पीने से लाभ होता है ।

नेत्र ज्योति :

नियमित रूप से एक गिलास गन्ने का रस पीने से नेत्रों की ज्योति अच्छी होती है ।

रक्त विकार :

भोजन के बाद एक गिलास गन्ने का रस पीने से रक्त विकार दूर होते हैं ।

कुकुर खांसी :

कच्ची मूली का 62 ग्राम रस निकल उसे एक गिलास गन्ने के रस में मिलाकर पिएं । इतनी ही मात्रा दिन में दो बार लें ।

पथरी :

गन्ने का रस नियमित रूप से सुबह-शाम पीने से पथरी टुकड़े-टुकड़े होकर निकल जाती है ।

सूखी खांसी :

नित्य दोनों समय गन्ने का एक गिलास रस पीने से सूखी खांसी में आराम मिलता है और छाती की घबराहट दूर होती है ।

रक्तातिसार :

एक प्याला गन्ने के रस से आधा कप अनार का रस मिलाकर सुबह-शाम पिएं । इसके नियमित प्रयोग से रक्तातिसार दूर हो जाता है।

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