आम कब एवं कैसे सेवन करें ?

आम खाना खाकर या दोपहर बाद खाने चाहिए । इसे निरन्न खाना हानिकारक होता है । खाली पेट खाने से यह पेट में गर्मी पैदा कर देता है जिससे बाद में और भी कई तरह के विकार उठ खड़े होते हैं । आम खाने के बाद दूध पीने से शरीर में शक्ति उत्पन्न होती है और दूध की लस्सी पीने से इसकी गर्मी का प्रभाव दूर होता है ।

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जामुन और दूध को आम का विरोधी कहा जाता है । अगर आम खाने के बाद कुछ जामुनें खा ली जाएं तो बहुत शीघ्र हजम हो जाता है और पेट में गिरानी नहीं महसूस होती । नींद न आने वाले रोगियों के लिये आप से अधिक गुणकारी कोई चीज नहीं । रात को सोने से पहले अगर आम खाकर दूध पी लिया जाए तो बहुत गहरी और शान्तिपूर्ण नींद आती है ।

गर्भवती महिलाओं के लिए आप सर्वोत्तम फल है । इससे न सिर्फ उनका स्वास्थ्य ही कायम रहता है, बल्कि बच्चा भी स्वस्थ और खूबसूरत पैदा होता है ।

आम को बर्फ में या पानी में ठण्डा करके खाना चाहिए । इस तरह इसकी गर्मी और हानिकारक तत्व दूर हो जाते हैं ।

आम यदि तुख्मी हों तो उन्हें हाथ में पिलपिला करके रस चूसा जाता है और यदि कलमी हों तो उन्हें तराश कर काशों की सूरत में खाया जाता है । परन्तु दोनों सूरतों में आम उचित मात्रा में ही खाने चाहिए। अधिक खाने से लाभ की अपेक्षा हानि होती है । अफारा, पेचिश, बदहजमी इत्यादि की शिकायत पैदा हो जाती है । कलमी आम की तुलना में तुख्मी आम अधिक लाभदायक होता है । यह उसकी तुलना में हजम भी शीघ्र होता है ।

आम बवासीर, संग्रहणी और कौलंज में लाभदायक है, किन्तु जिगर के लिए हानिकारक है । हां, अलबत्ता तुर्श आम जिगर के लिए अधिक हानिकारक नहीं ।
इसका मुरब्बा दिल और मेदे को शक्ति प्रदान करता है और बवासीर को दूर करता है । आम का अचार खांसी, जुकाम और नजले की शिकायत पैदा करता है, किन्तु स्वस्थ रहने पर कभी-कभी इसके इस्तेमाल से कोई हर्ज नहीं है ।

आम चूसने के बाद यदि बोझ अथवा गिरानी-सी अनुभव होने लगे तो थोङा-सा नमक या बारीक पिसी हुई सोंठ चाट लें । इससे गिरानी की शिकायत तुरंत दूर हो जायेगी ।

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Post Author: ayurvedatips

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